तन्हा से इस सफर मे, मैं सभी से मिला;
कभी अश्क थे, कभी थी खुशी;
मैं खोकर खुदी को, ख़ुद ही से मिला;
कितने बेरंग रंग सारे लगने लगे थे,
अपने सारे अजनबी से दिखने लगे थे;
मैं खामोशियों की हर उलझनों से मिला,
कभी अश्क थे, कभी थी खुशी;
मैं खोकर खुदी को, ख़ुद ही से मिला;
कितने बेरंग रंग सारे लगने लगे थे,
अपने सारे अजनबी से दिखने लगे थे;
मैं खामोशियों की हर उलझनों से मिला,
मिटे दिल के घावो मे, दर्द कभी सोता नहीं;
किसी न किसी मोड़ पे, याद आते हैं सपने;
कभी जो हकीक़त हो, या हो एक अपने;
नही छुटते हम, यादों मे खोने लगे थे;
मगर रास्तो मे कुछ, पराये हमसफ़र से मिला;
खोकर मैं जिन्दगी, जिन्दगी से मिला।
.Composed by: Deepak Chandra
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