Sunday, July 29, 2007

अच्छा लगता है !




वो अपनी है या बेगानी .. अच्छा लगता है ,
दो पल उसके साथ बिताना .. अच्छा लगता है,
रोज़ बहाने कर के जाना .. अच्छा लगता है,
इक झलक भी उसकी पाना .. अच्छा लगता है,
.
कहने को जब चांहू .. हाँ कर देगी वो,
लेकिन फिर भी उसका .. ना ना अच्छा लगता है,
उसकी
बात अलग है .. मुझको कुछ भी कह ले,
आशिक, पागल या दीवाना, अच्छा लगता है,


उसको लोग शमा कहते हैं .. मुस्काती है वो,
मुझको कहते है परवाना .. अच्छा लगता है,
रिश्ता है ना जाने .. मेरा उससे क्या,
मेरे खवाबो में भी उसका आना .. अच्छा लगता है ।

Friday, July 27, 2007

तुझे खोने का एहसास सताता रहा

"तुझे खोने का एहसास सताता रहा ------
हर तन्हाई में तेरा प्यार याद आता रहा ------


------कभी तो सोचा होगा तुमने
------क्यूँ खुदा मुझे तुमसे मिलाता रहा


न मिलकर भी गर बन गयी दोस्ती अपनी ------
मिलने की लगन मुझे पल पल रुलाता रहा ------


------कैसे हर जज्बात बताऊ तुझको
------मेरी रूह में साया तेरा मुस्कुराता रहा
ये बस दरमियान ही तो है कुछ फासले ------
वरना दिल की धरकन बन तू इतराता रहा ------


------देख लो कहीं जुदाई न बन जाए इम्तिहान अपना
------वक्त का हर सितम कबसे मुझे मिटाता रहा


न जाने क्यों तू मुझे याद आता रहा ------
तुझे खोने का एहसास सताता रहा ------"



composed by: D.C ( 30 nov 2006.. )

Monday, July 23, 2007

Sometimes..

Sometimes I see u as
the only one closest to me like that.
Sometimes i see
the never ending Gap between us.

Sometimes i want to hear you
as i have something to listen from you.
Sometime i see the un-said pain
in the turbulence of your voice.

Sometime i Love the way you smile
yet i cry along with when your tears get dry.
Sometimes i feel the warm touch
and affection given to me.

Sometimes i realise the trust
and the respect you do i do.
Sometimes you go alone
and i cannot get anything to do.

Sometimes i miss u that much
or you love me too????

Cmp. by: Deepak Chandra