कितनी तन्हा - जिन्दगी है यहाँ
पूछे ना ये कभी.
मैं कहाँ - तू कहाँ
मंजिलो के - हर निशाँ
याद हैं बस धुंआ
रात दिन - दिन पहर
सोचता हूँ - बेखबर
हाँ किसी मोड़ पे - हाँ किसी भी सफ़र
मिलेगा वो जानेपल -!२!
मेरी खामोशियाँ - मेरी मदहोशियाँ
चूम लेगा कहें - वो किसी भी घडी
उसको आवाज दूं - या मैं देखा करू
दिल बता तू बता
क्या करूँ - क्या करूँ
जिन्दगी तू बता
मंजिलो के हर निशाँ
याद है बस धुंआ ही धुंआ
ना मैं शामिल रहा - ना हुआ मैं जुदा
तू रहा मुझमें यूं
खो सका ना ये जुनू
दूर आवाज ने मुझको समझा दिया
तू हवा है हवा
पर मैं बढ़ता रहा
बादलों सा - मैं हर कहा
आंधियों से लड़ता रहा
रह गये आज हम , ये कहाँ - बस निशाँ
जिन्दगी तू बता
मंजिलो के हर निशाँ
याद है बस धुंआ ही धुंआ
भूल कर - पास में
तू चले - साथ मे
हर सफ़र हर डगर
थामना हमसफ़र
बन सके मेरा दिल
तू ही मुझे धड़क
आज मिल आके मिल ...जिन्दगी संग चल
संग चल - जिन्दगी
अब नही - अब नही
तेरे बिन - बिन तेरे
आज मिल आके मिल ...जिन्दगी संग चल
जिन्दगी तू बता
मंजिलो के हर निशाँ
याद है बस धुंआ ही धुंआ
Composed by - deepak chandra
25th AUG 2009
dadaji......mast song hai..........best tb hoga jab aap isko gaoge :) :D
ReplyDeleteabey sahi mein achcha likha hai tune... lagta hai aajkal ladkiyon par dhyaan nahin hai tera...!!! :P
ReplyDeletemind blowing...
sabse behtar lagi...
उसको आवाज दूं - या मैं देखा करू
दिल बता तू बता
क्या करूँ - क्या करूँ
जिन्दगी तू बता
मंजिलो के हर निशाँ
याद है बस धुंआ ही धुंआ
sir, its really a wonderful poem which i ever read and the best part of the poem is that its a heart touching and related with rality of life. after reading this poem now i can say that u r really very creative please give me some suggestion so that i can be creative like u.
ReplyDeleteALKA
Nice composition..heart touching:)
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