Thursday, September 25, 2008

Krishna Bhajan

अब के सावन.. वृन्दावन मैं, जाके बिताऊंगा
बीत गयी जो रात पुरानी... बीत गयी जो रात पुरानी
उन्हें फिर जी जाऊंगा...

'कान्हा' तेरे नक्शे कदम मैं... 'कान्हा' तेरे नक्शे कदम मैं ..
फिर चल के दिखाऊंगा...


मधुबन के 'वट'... रहते हैं सूखे..
भवरों के 'मुहं'.. होते ना झूठे..
तेरी यादें... बिसरे ना कोई..
देर ना कर अब... जल्दी से आजा.


हर आहट पे 'गोपी' ना सोये... जाने किस पल 'दर्शन' होए
इक वीरानी सी खामोशी है... तुमबिन ये ज़ग एक 'बेहोशी ' है
लौट के 'आ' अब... कर दे दिल में उजाला..
'जमुना' का 'तट'... है तुम बिन 'काला'

.
तेरी 'बंसी' फिर से सुनूंगा... बोलके तुझसे अब मैं रहूँगा
कैसे ना कोई तू -छुप- के रहेगा... जब मैं बुलाऊ तुझे आना पडेगा..
देख ज़रा तू... हम सब की उदासी... :(
अब तक 'अटकी' है साँसों में... साँसे जरा सी..


वो दिन कितने सुन्दर से... जब तुमसे ये मौसम मिलते थे
अब तो ये भी... 'रस्ता'... तेरा ही 'ताकें'
जाने फिर कब... 'मोहन'... इन गलियों मे 'झाकें'
राधे राधे कृष्णा कृष्णा...
मिट जाये... अब हर... दिल की ये तृष्णा...


अब के सावन.. वृन्दावन मैं, जाके बिताऊंगा
बीत गयी जो रात पुरानी... बीत गयी जो रात पुरानी
उन्हें फिर जी जाऊंगा...

'कान्हा' तेरे नक्शे कदम मैं... 'कान्हा' तेरे नक्शे कदम मैं...
फिर चल के दिखाऊंगा...



Composed by: Deepak Chandra


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